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हमारे बारे में · About Nagnechi Mata

राठौड़ वंश की कुलदेवी · श्री नागणेच्या माता मंदिर, नागाणा — जोधपुर, राजस्थान

परिचय (Introduction)

माता नागणेच्या (Nagnechiya / Nagnechi Mata) को राठौड़ वंश की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। राजस्थान के नागाणा गाँव (बालोतरा/जोधपुर जिला) में विराजमान यह मंदिर सदियों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है — न केवल राठौड़ समाज के लिए, अपितु समस्त भक्तों के लिए एक जीवंत शक्तिपीठ है।

माता को चक्रेश्वरी देवी, राठेश्वरी, मंशा देवी व पंखणी माता आदि नामों से भी संबोधित किया जाता है; ये नाम शक्ति, संरक्षण, विवेक व समृद्धि की भावना से जुड़े हैं।

प्राचीन इतिहास एवं स्थापना (Origin & History)

मूलतः माता चक्रेश्वरी के रूप में दक्षिण भारत के कर्नाटक/कोंकण क्षेत्र में पूजनीय थीं। 13वीं शताब्दी में मारवाड़ के राठौड़ शासक राव धुहड़ अपने कुल की आध्यात्मिक रक्षा हेतु देवी की मूर्ति लेने सुदूर दक्षिण यात्रा पर गए। देवी की पवित्र काष्ठ (नीम की लकड़ी) की मूर्ति को रथ में लेकर जब वे मारवाड़ पहुँचे, तो नागाणा गाँव में आकर रथ रुक गया।

वहाँ देवी ने नीम के वृक्ष के नीचे विराजने की इच्छा प्रकट की। उसी नीम के वृक्ष के निकट भव्य मंदिर की स्थापना की गई और नागाणा गाँव में विराजने के कारण माता को नागणेची (Nagnechi) नाम मिला।

राठौड़ राजवंश व लोक परंपरा (Rathore Connection)

माता नागणेची राठौड़ साम्राज्य की अधिष्ठात्री रही हैं। राव जोधा ने जोधपुर स्थापना के समय मेहरानगढ़ दुर्ग में माता की मूर्ति स्थापित की, तो राव बीका ने बीकानेर दुर्ग में। मारवाड़ और बीकानेर के ऐतिहासिक राजकीय ध्वजों पर अंकित बाज पक्षी (पंखिणी/Falcon) माता नागणेची के दिव्य स्वरूप को ही दर्शाता है। कुल की परंपरा के अनुसार, नीम के पेड़ की टहनी को काटना या जलाना वर्जित माना जाता है।

श्री नागणेच्या जी मंदिर ट्रस्ट (Temple Trust Details)

मंदिर की सभी व्यवस्थाओं, धर्मशाला प्रबंधन, दैनिक भंडारे और उत्सवों का आयोजन **श्री नागणेच्या जी मंदिर ट्रस्ट (रजि. नं. 14/बाड़मेर/1992)** द्वारा किया जाता है। ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य मंदिर परिसर के गौरवशाली इतिहास को सहेजना, भक्तों की सुविधाओं को बढ़ाना और सामाजिक कल्याणकारी कार्यों को संचालित करना है।

ट्रस्ट अध्यक्ष (Trust President): श्री मान सिंह राठौड़ (नागाणा)

सचिव (Secretary): श्री विक्रम सिंह जी

पंजीकरण संख्या: 14/Devesthan/Marwar/1992 (Rajasthan Devsthan Dept.)

वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट देवस्थान विभाग, राजस्थान सरकार को नियमित जमा की जाती है।

पूछे जाने वाले प्रश्न (Useful FAQs)

Q1. माँ नागणेची माता का मुख्य मंदिर कहाँ स्थित है?

माँ नागणेच्या का मूल और सबसे मुख्य मंदिर राजस्थान के जोधपुर संभाग के नवगठित बालोतरा जिले (पूर्व में बाड़मेर जिला) के कल्याणपुर तहसील के 'नागाणा गाँव' (Nagana Village) में स्थित है। यह जोधपुर शहर से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर राष्ट्रीय राजमार्ग 25 (NH 25) के निकट स्थित है।

Q2. माता नागणेच्या का राठौड़ वंश से क्या संबंध है?

माता नागणेच्या (चक्रेश्वरी देवी) राठौड़ राजपूत राजवंश की 'कुलदेवी' (Kuldevi) हैं। राठौड़ शासकों की सभी शाखाओं (जोधपुर, बीकानेर, किशनगढ़, रतलाम आदि) में माँ नागणेच्या की पूजा आराध्य देवी के रूप में की जाती है।

Q3. नागणेची माता की मूर्ति को नागाणा में किसने और कब स्थापित किया?

ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार, राठौड़ राजवंश के प्रतापी शासक राव धुहड़ (Rao Duhad) ने 13वीं-14वीं शताब्दी के मध्य (पारंपरिक रूप से विक्रम संवत 1248 / 1349 ई.) में दक्षिण भारत के कर्नाटक क्षेत्र से माता चक्रेश्वरी की लकड़ी की मूर्ति लाकर नागाणा में नीम के पेड़ के नीचे स्थापित की थी।

Q4. देवी का नाम 'नागणेची' कैसे पड़ा?

कर्नाटक में देवी को 'चक्रेश्वरी' के रूप में पूजा जाता था। जब राव धुहड़ ने इस मूर्ति को 'नागाणा' गाँव में स्थापित किया, तो स्थान के नाम पर माता को 'नागणेची' या 'नागणेच्या' कहा जाने लगा (अर्थात् नागाणा की माता)।

Q5. बाज पक्षी (Pankhini) और नीम के पेड़ का क्या महत्व है?

बाज पक्षी (पंखिणी/सैन) को माता नागणेची का साक्षात स्वरूप या वाहन माना जाता है, जो राठौड़ साम्राज्य के झंडों पर भी अंकित है। नीम के पेड़ के नीचे माता की स्थापना होने के कारण, नीम को अत्यंत पवित्र माना जाता है और राठौड़ वंश के भक्त नीम की लकड़ी काटने या उसे जलाने से बचते हैं।

Q6. मंदिर में दर्शन का सही समय क्या है और क्या कोई प्रवेश शुल्क है?

मंदिर प्रतिदिन सुबह 5:00 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक खुला रहता है। मंदिर में प्रवेश और दर्शन पूर्णतः निःशुल्क हैं। विशेष त्यौहारों (जैसे नवरात्रि) पर मंदिर चौबीस घंटे भी खुला रह सकता है।

Q7. क्या मंदिर परिसर में भक्तों के रुकने की व्यवस्था है?

हाँ, मंदिर ट्रस्ट द्वारा संचालित धर्मशालाओं में रुकने के लिए सामान्य Non-AC कमरे व बड़े हॉल उपलब्ध हैं (कमरे आगमन पर आवंटित किए जाते हैं)।

माता नागणेच्या का यह पवित्र धाम न केवल राठौड़ कुल के लिए, अपितु संपूर्ण श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का प्रतीक है। यहाँ आने वाले प्रत्येक भक्त को माता की कृपा व आशीर्वाद का अनुभव हो — यही हमारी श्रद्धा का सार है।